SINGRAULI NEWS:सीएम साहब! नशे के खिलाफ अभियान के बाद भी माड़ा से उठ रहे गंभीर सवाल गांजा, हेरोइन, रेत और कबाड़ के कथित कारोबार को लेकर थाना क्षेत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल
सिंगरौली। प्रदेश में कुछ समय पहले “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान चलाकर नशे के खिलाफ जागरूकता और सख्त कार्रवाई का संदेश दिया गया था।

गूंज सिंगरौली की पत्रिका
सिंगरौली। प्रदेश में कुछ समय पहले “नशे से दूरी है जरूरी” अभियान चलाकर नशे के खिलाफ जागरूकता और सख्त कार्रवाई का संदेश दिया गया था। अभियान अब समाप्त हो चुका है, लेकिन सिंगरौली जिले के माड़ा थाना क्षेत्र में नशे और कथित अवैध गतिविधियों को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय स्तर पर प्राप्त शिकायतों और चर्चाओं के अनुसार माड़ा थाना क्षेत्र में कथित रूप से गांजा, हेरोइन, अवैध रेत, कबाड़ तथा अन्य संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े कारोबार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में शिकायतों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अभियान खत्म हुआ, लेकिन सवाल अभी बाकी
“नशे से दूरी है जरूरी” अभियान के दौरान प्रदेशभर में नशे के खिलाफ कार्रवाई और जागरूकता का संदेश दिया गया था। अब अभियान समाप्त होने के बाद माड़ा क्षेत्र से कथित नशे के कारोबार को लेकर शिकायतें सामने आना पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
यदि क्षेत्र में वास्तव में नशीले पदार्थों का कारोबार हो रहा है तो इसकी जानकारी पुलिस के संज्ञान में क्यों नहीं आ रही? और यदि शिकायतें गलत हैं तो जांच कर सच्चाई जनता के सामने क्यों नहीं रखी जाती?
खाकी की निगरानी पर सवाल, माफियाओं पर कार्रवाई कब?
माड़ा थाना क्षेत्र में गांजा, हेरोइन, रेत और कबाड़ से जुड़े कथित कारोबार को लेकर अलग-अलग शिकायतों का सामने आना गंभीर विषय है। स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस की निगरानी व्यवस्था ऐसे कारोबार पर प्रभावी ढंग से नजर रख रही है।
थाना प्रभारी शिवपूजन मिश्रा की कार्यप्रणाली को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जाने की चर्चा है। हालांकि, किसी भी अधिकारी पर संरक्षण या मिलीभगत का आरोप जांच में प्रमाणित होने के बाद ही तथ्य माना जा सकता है।
गांजा से रेत-कबाड़ तक—कई मोर्चों पर सवाल
माड़ा क्षेत्र में कथित नशीले पदार्थों के कारोबार के अलावा अवैध रेत और कबाड़ गतिविधियों को लेकर भी शिकायतों की चर्चा है। यदि इन शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था का भी गंभीर प्रश्न होगा।
नई जिम्मेदारी से पहले पुराने सवालों की जांच जरूरी
स्थानीय सूत्रों के अनुसार शिवपूजन मिश्रा को भविष्य में किसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की चर्चा भी है। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में यदि उन्हें आगे कोई नई जिम्मेदारी दी जाती है तो माड़ा थाना क्षेत्र से जुड़ी शिकायतों और वर्तमान कार्यप्रणाली की निष्पक्ष समीक्षा किया जाना जरूरी होगा। इससे न केवल शिकायतों की वास्तविकता सामने आएगी, बल्कि पुलिस प्रशासन की पारदर्शिता पर भी जनता का भरोसा मजबूत होगा।
अब वरिष्ठ अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद
माड़ा क्षेत्र से उठ रहे इन सवालों के बीच अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और यदि किसी भी प्रकार का अवैध कारोबार प्रमाणित होता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
वहीं यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर संबंधित अधिकारी की छवि पर लगे सवालों को भी समाप्त किया जाना चाहिए।
सीएम साहब! अभियान खत्म हो गया, सवाल नहीं
नशे के खिलाफ चलाया गया अभियान भले ही काफी पहले समाप्त हो चुका हो, लेकिन उसका उद्देश्य और संदेश केवल अभियान की अवधि तक सीमित नहीं होना चाहिए।
माड़ा क्षेत्र से उठ रहे सवालों का जवाब अब निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई से मिलना चाहिए।
आरोप सही हैं तो दोषियों पर कार्रवाई हो, आरोप गलत हैं तो जांच में सच्चाई सामने आए—लेकिन गंभीर शिकायतों को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
अब निगाहें मुख्यमंत्री, पुलिस मुख्यालय और सिंगरौली के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर हैं कि माड़ा थाना क्षेत्र से जुड़े इन सवालों पर क्या कदम उठाया जाता है।














