कप्तान साहब! यह कैसा निर्देश? नवागत कोतवाली टीआई के रहते खजुरी नदी में कथित संरक्षण का खेल शाम ढलते ही सक्रिय हो जाते हैं रेत के ट्रैक्टर, गश्ती पुलिस की नजर से कैसे बच रहे अवैध परिवहन के वाहन?
17 सितम्बर। बैढ़न कोतवाली क्षेत्र की खजुरी नदी में रेत के कथित अवैध कारोबार ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है।

गूंज सिंगरौली की पत्रिका
सिंगरौली, 17 सितम्बर। बैढ़न कोतवाली क्षेत्र की खजुरी नदी में रेत के कथित अवैध कारोबार ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। स्थानीय नागरिकों और सूत्रों के हवाले से आरोप है कि शाम ढलते ही दूसरे दिन सुबह तक आधा दर्जन से अधिक ट्रैक्टर रेत के परिवहन में सक्रिय रहते हैं, लेकिन पुलिस की गश्त के बावजूद इन वाहनों पर कार्रवाई नहीं होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
रेत के खेल में ‘खाकी संरक्षण’ के आरोप से मचा हड़कंप
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कोतवाली बैढ़न के कुछ कथित पुलिस कर्मियों की रेत कारोबारियों से सांठगांठ है। आरोप है कि कथित संरक्षण के चलते खजुरी नदी से रेत का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पुलिसकर्मियों का पक्ष सामने आना शेष है।
तीन-चार वर्षों से जारी है कथित अवैध रेत कारोबार
स्थानीय लोगों का कहना है कि बैढ़न क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन की शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप है कि प्रभावी कार्रवाई के अभाव में कारोबारियों के हौसले लगातार बढ़ते गए। अब एक बार फिर खजुरी नदी और आसपास के मार्गों पर रात के समय ट्रैक्टरों की आवाजाही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
‘सुविधा शुल्क’ वसूली के भी गंभीर आरोप
सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि रेत कारोबारियों से कथित तौर पर तीन से पांच हजार रुपये तक की रकम वसूली जाती है और इसके लिए कुछ लोगों की भूमिका तय होने की बात कही जा रही है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह पूरे पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
नवागत टीआई को अंधेरे में रखकर चल रहा है खेल?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि खजुरी नदी से रात-दिन रेत का परिवहन हो रहा है तो नवागत कोतवाली प्रभारी की नजर इन गतिविधियों तक क्यों नहीं पहुंच रही? स्थानीय सूत्रों का दावा है कि जिम्मेदार अधिकारी को वास्तविक स्थिति से अनभिज्ञ रखकर कुछ लोग अपने स्तर पर पूरा खेल संचालित कर रहे हैं।
गश्त करती पुलिस, फिर भी ट्रैक्टरों पर नजर क्यों नहीं?
देवरा-गनियारी मार्ग सहित आसपास के रास्तों पर रात के समय रेत से लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही की शिकायतें सामने आ रही हैं। नागरिकों का सवाल है कि यदि पुलिस नियमित गश्त करती है, तो फिर ये वाहन लगातार पुलिस की नजरों से कैसे बच निकलते हैं? क्या गश्त की जानकारी पहले ही कारोबारियों तक पहुंच जाती है? इन सवालों का जवाब अब पुलिस विभाग को देना होगा।
कप्तान साहब से जांच की मांग
बढ़ते आरोपों के बीच स्थानीय नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि खजुरी नदी से रेत के अवैध कारोबार, रात में ट्रैक्टरों की आवाजाही तथा पुलिसकर्मियों पर लगाए जा रहे संरक्षण और कथित वसूली के आरोपों की जांच वरिष्ठ अधिकारी से कराई जानी चाहिए यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप निराधार हैं तो पुलिस विभाग को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए अब सवाल सिर्फ खजुरी नदी की रेत का नहीं, बल्कि पुलिस की निगरानी और जवाबदेही का भी है।















