देवसरमध्य प्रदेशसिंगरौली

स्कूल परिसर में रेत का अवैध भंडारण, प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल देवसर के मजौना स्थित शासकीय विद्यालय का परिसर बना अवैध रेत भंडारण का ठिकाना

सिंगरौली/देवसर। बच्चों की पढ़ाई, खेलकूद और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए निर्धारित स्कूल परिसर में यदि रेत के ढेर नजर आएं, तो सवाल सिर्फ अवैध भंडारण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता का भी उठता है। देवसर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत मजौना के बसहा स्थित शासकीय प्राथमिक/माध्यमिक विद्यालय परिसर में रेत के बड़े-बड़े ढेर लगे होने की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल परिसर का इस्तेमाल लंबे समय से रेत के भंडारण के लिए किया जा रहा है।

स्कूल परिसर में रेत का इस तरह जमा होना बच्चों की गतिविधियों के लिए उपलब्ध जगह पर भी असर डाल रहा है। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि विद्यालय जैसी सार्वजनिक और शैक्षणिक संस्था की जमीन पर किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या खनिज भंडारण को लेकर जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

निरीक्षण हुआ तो कार्रवाई कहां हुई?

जानकारी के अनुसार, बीते दिनों खनिज और राजस्व अमले द्वारा क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण भी किया गया था। इसके बावजूद यदि निरीक्षण के बाद भी स्कूल परिसर में रेत के ढेर मौजूद हैं, तो सवाल यह है कि जांच के दौरान क्या स्थिति सामने आई और उसके बाद क्या कार्रवाई की गई? क्या संबंधित विभाग ने रेत के स्रोत, स्वामित्व और भंडारण की वैधता की जांच की? यदि भंडारण अवैध पाया गया था तो अब तक रेत हटाने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि भंडारण वैध है तो स्कूल परिसर में रेत रखने की अनुमति किस आधार पर दी गई?

‘अज्ञात व्यक्ति’ के नाम पर जिम्मेदारी से बचने का आरोप

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई की स्थिति बनने पर रेत को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा डंप किए जाने की बात कहकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जाता है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि मौके पर मिले रेत के ढेर के संबंध में विभागीय जांच में किसकी जिम्मेदारी तय की गई और दस्तावेजों में क्या तथ्य सामने आए।

स्कूल कर्मियों के रिश्तेदारों पर भी लगाए जा रहे आरोप

स्थानीय ग्रामीणों और कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने स्कूल में पदस्थ कर्मियों के सगे-संबंधियों की कथित संलिप्तता के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसे आरोप सामने आए हैं, तो मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि स्कूल परिसर में रेत किसने और किस अनुमति के आधार पर जमा की।

प्रशासन के सामने अब कई सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब स्कूल परिसर में रेत के बड़े-बड़े ढेर खुले तौर पर मौजूद हैं और संबंधित विभाग क्षेत्र का निरीक्षण भी कर चुका है, तो अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन यह जांच करेगा कि रेत कहां से लाई गई, किसकी है और स्कूल परिसर में किसकी अनुमति से जमा की गई? क्या विद्यालय प्रबंधन से इस संबंध में जवाब लिया गया है? और यदि भंडारण नियम विरुद्ध पाया जाता है, तो क्या रेत तत्काल हटाकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, विद्यालय परिसर को रेत के भंडारण से मुक्त कराने तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

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लाले विश्वकर्मा, "गूँज सिंगरौली की" डिजिटल न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक और संस्थापक सदस्य हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष एवं जनसेवा भाव से समाचार प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।

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