सिंगरौली के शराब कारोबार पर भोपाल में बड़ा धमाका! CM कार्यालय में शिकायत के बाद वल्लभ भवन मंत्रालय से आधिकारिक पुष्टि मोनार्क वाइंस की बढ़ सकती हैं मुश्किलें! शराब कारोबार के आरोपों की जांच की मांग, आबकारी विभाग और पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
संपादक लाले विश्वकर्मा की पहल लाई मामला सरकारी शिकायत तंत्र तक, अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें

गूंज सिंगरौली की विशेष पड़ताल
भोपाल/सिंगरौली। सिंगरौली जिले में कथित अवैध शराब कारोबार को लेकर चल रही शिकायतों ने अब भोपाल के प्रशासनिक गलियारों तक दस्तक दे दी है। गूंज सिंगरौली की पत्रिका के संपादक लाले विश्वकर्मा द्वारा 4 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय में सौंपे गए शिकायती आवेदन के बाद अब मध्य प्रदेश शासन के वल्लभ भवन मंत्रालय स्थित लोक सेवा प्रबंधन विभाग के पत्र में शिकायत के आधिकारिक रूप से दर्ज होने की पुष्टि सामने आई है। शिकायत की प्राथमिकता उच्च दर्शाई गई है। इस घटनाक्रम के बाद अब संबंधित विभाग की जांच और आगे की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
पहले ईमेल और X पर शिकायत, फिर CM कार्यालय पहुंचकर सौंपा आवेदन
सिंगरौली में शराब कारोबार से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर संपादक लाले विश्वकर्मा ने पहले ईमेल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से शिकायतें भेजीं। इसके बाद 4 अक्टूबर को भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से आवेदन सौंपा और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की शिकायतकर्ता की मांग थी कि मामले को केवल सामान्य शिकायत मानकर छोड़ने के बजाय संबंधित क्षेत्रों में शराब बिक्री की वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए। अब सरकारी पत्र में शिकायत दर्ज होने की पुष्टि के बाद मामले ने नया प्रशासनिक मोड़ लिया है।
वल्लभ भवन मंत्रालय के पत्र में शिकायत दर्ज होने की पुष्टि
उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय से प्राप्त आवेदन के आधार पर शिकायत को मध्य प्रदेश शासन के लोक सेवा प्रबंधन विभाग के माध्यम से एम.पी. समाधान पोर्टल पर दर्ज किया गया है यह शिकायत के आधिकारिक पंजीकरण की पुष्टि है। हालांकि, दस्तावेज में मुख्यमंत्री द्वारा व्यक्तिगत रूप से कार्रवाई का आदेश दिए जाने, किसी अधिकारी को दोषी ठहराए जाने या मोनार्क वाइंस के विरुद्ध कार्रवाई शुरू होने की पुष्टि नहीं है। अब संबंधित विभाग की ओर से की जाने वाली जांच और आधिकारिक कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
मोनार्क वाइंस को लेकर शिकायत में गंभीर आरोप
शिकायत में शराब ठेकेदार मोनार्क वाइंस से जुड़े कारोबार को लेकर कथित पैकारी, निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर शराब बिक्री और होम डिलीवरी जैसे आरोपों की जांच की मांग की गई है शिकायतकर्ता ने बरगवां, गोरबी, गोनरा, कचनी, नौगढ़ और खुटार सहित विभिन्न क्षेत्रों में शराब बिक्री की वास्तविक स्थिति सामने लाने का अनुरोध किया है। संबंधित दुकानों के बिक्री रिकॉर्ड, निर्धारित मूल्य और शराब उपलब्ध कराने के तरीकों की जांच कराने की मांग भी की गई है यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई का प्रश्न उठेगा। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आबकारी विभाग की भूमिका पर भी निगाहें
शिकायत में सिंगरौली के आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है अब सवाल है कि क्या संबंधित विभाग शराब दुकानों के रिकॉर्ड की जांच करेगा? क्या निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली और कथित पैकारी के आरोपों की पड़ताल होगी? और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी?
पुलिस की भूमिका को लेकर भी जांच की मांग
शिकायत में कथित अवैध शराब कारोबार को लेकर पुलिस के संभावित संरक्षण अथवा लापरवाही के आरोपों की भी जांच कराने का अनुरोध किया गया है। हालांकि, किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इस मामले में तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
लाले विश्वकर्मा की पहल के बाद अब अगला कदम क्या?
ईमेल से लेकर X और फिर मुख्यमंत्री कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से आवेदन सौंपने तक, लाले विश्वकर्मा ने शराब कारोबार से जुड़े इस मुद्दे को लगातार उठाया। अब वल्लभ भवन मंत्रालय के पत्र में शिकायत दर्ज होने की पुष्टि के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण संबंधित विभाग की जांच और कार्रवाई होगा।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है क्या शिकायत के आधार पर जमीनी जांच होगी? क्या कथित अनियमितताओं के प्रमाण जुटाए जाएंगे? और यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो क्या संबंधित ठेकेदारों या जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी?
गूंज सिंगरौली की का सीधा सवाल शिकायत दर्ज, अब कार्रवाई कब?
मुख्यमंत्री कार्यालय में आवेदन सौंपे जाने और मंत्रालय के पत्र में शिकायत दर्ज होने की पुष्टि के बाद अब जनता को जांच की वास्तविक स्थिति जानने का इंतजार है। जनहित से जुड़े इस मामले में पारदर्शी जांच होनी चाहिए और यदि नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
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नोट: यह समाचार 4 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री कार्यालय में सौंपे गए आवेदन तथा वल्लभ भवन मंत्रालय के उपलब्ध पत्र पर आधारित है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित ठेकेदार, अधिकारियों और विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
















