छठ पूजा

Chhath Puja 2025: नाक से माथे तक सिंदूर क्यों लगाती हैं छठव्रती महिलाएं? इसके पीछे छिपा है गहरा विज्ञान

छठ पूजा में नारंगी सिंदूर का रंग क्यों होता है खास? जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक रहस्य

By सोनू विश्वकर्मा

Chhath Puja 2025:  छठ पूजा का जिक्र होते ही घाट पर महिलाओं द्वारा पूजा करने का दृश्य याद आता है। इस मनमोहक दृश्य में सिर पर साड़ी का पल्लू लिए, मांग से गहरा नारंगी रंग का सिंदूर जो कि माथे से होता हुआ नाक तक खिंचा दिखता है। छठ पूजा में सबसे खास महिलाओं के सिंदूर लगाने की परंपरा है,

जिसे देखकर ही बताया जा सकता है कि यह छठ पूजा के लिए तैयार हैंछठ पूजा में नाक से माथे तक लगाया गया ऑरेंज सिंदूर न केवल सौभाग्य का प्रतीक है, बल्कि सूर्य की उषमा और स्त्री की शीतलता का मिलन भी है। यह बताता है कि भारत की हर परंपरा में विज्ञान की गहराई और आत्मा की रोशनी साथ-साथ चलती है और यही छठ पूजा की सबसे बड़ी सुंदरता है। आइए जानते हैं छठ पूजा में महिलाएं नारंगी रंग का सिंदूर क्यों लगाती हैं, इसका धार्मिक औऱ वैज्ञानिक कारण। साथ ही नाक से माथे तक सिंदूर क्यों लगाया जाता है

सिंदूर के रंग का सूर्य से संबंध

छठ पूजा सूर्य देव की आराधना का पर्व है। सिंदूर का गहरा नारंगी रंग सूर्य की किरणों का प्रतीक है। इसे ऊर्जा, तेज और जीवन का रंग भी मान सकते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से भी, नारंगी रंग सकारात्मक कंपन उत्पन्न करता है, जिससे मनोबल बढ़ता है और शरीर में रक्त प्रवाह सक्रिय होता है। जब महिलाएं नाक से माथे तक सिंदूर लगाती हैं तो यह रंग सूर्य की दिव्यता और स्त्री ऊर्जा के मिलन का संकेत बन जाता है

सिंदूर लगाने का स्थान और उसका वैज्ञानिक प्रभाव

नाक से माथे तक का भाग यानी अग्निचक्र और आज्ञाचक्र के बीच की रेखा होती है, जो शरीर के न्यूरोलॉजिकल पॉइंट्स से जुड़ी होती है। सिंदूर लगाने से,

  • इस क्षेत्र में रक्त प्रवाह और तंत्रिका तंत्र सक्रिय रहता है।
  • तनाव, सिरदर्द और मानसिक थकान कम होती है।
  • यह मस्तिष्क को ठंडक और मन को एकाग्रता देता है।

आयुर्वेद के अनुसार, सिंदूर में हल्दी और पारा होता है। हेल्दी में एंटीसेप्टिक और ऊष्मा नियंत्रक गुण पाए जाते हैं। यह सर्द मौसम में शरीर को तापीय संतुलन प्रदान करता है — यही कारण है कि छठ पूजा, जो अक्सर कार्तिक मास के शीतल दिनों में होती है, में इसका प्रयोग अत्यंत लाभकारी माना गया है।

नाक से माथे तक सिंदूर लगाने का धार्मिक और सामाजिक अर्थ

छठ में महिलाएं यह सिंदूर इसलिए लगाती हैं क्योंकि यह उनके सौभाग्य, समर्पण और प्रार्थना का प्रतीक है। नाक से माथे तक सिंदूर लगाने का अर्थ है  छठ पूजा में व्रती महिलाएं स्वयं को सूर्य की तेजस्विता और देवी उषा की शुद्धता के साथ जोड़ती हैं, इसलिए सिंदूर को इस दिन “पवित्र अग्नि रेखा” भी कहा जाता है।

क्यों ऑरेंज नारंगी सिंदूर ही होता है खास?

छठ में महिलाएं लाल नहीं बल्कि ऑरेंज टोन का सिंदूर लगाती हैं, क्योंकि यह रंग न तो पूरी तरह आक्रामक है, न ही निष्क्रिय। यह संतुलन  और उर्जा दोनों का प्रतीक है

GSK NEWS

लाले विश्वकर्मा, "गूँज सिंगरौली की" डिजिटल न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक और संस्थापक सदस्य हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष एवं जनसेवा भाव से समाचार प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।

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