Chhath Puja 2025: छठ पूजा 2025: कब और कैसे दें संध्या अर्घ्य, जानें शुभ समय
सूर्य देव की आराधना: संध्या अर्घ्य का सही तरीका और मुहूर्त

By सोनू विश्वकर्मा
27 अक्तूबर को छठ महापर्व का तीसरा दिन है, जो बहुत ही खास होता है। आज लोक आस्था का महापर्व छठ है। हिंदू धर्म में दिवाली के छठे दिन बाद लोक आस्था का महापर्व छठ मनाया जाता है। छठ महापर्व चार दिनों तक चलता है जिसमें पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर समापन होता है
इस बार छठ महापर्व 25 अक्तूबर को शुरू होकर 28 अक्तूबर तक चलेगा। 27 अक्तूबर को छठ महापर्व का तीसरा दिन है, जो बहुत ही खास होता है। इस दिन संध्या अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है। षष्ठी को डूबते सूर्य को अर्घ्य और उगते सूर्य सप्तमी को अर्घ्य देकर व्रत समाप्त होता है। इस चार दिवसीय त्योहार में सूर्य और छठी मैया की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत करना बहुत कठिन माना जाता है क्योंकि इस व्रत को कठोर नियमों के अनुसार 36 घंटे तक रखा जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार समेत उत्तर भारत में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह व्रत संतान के सुखी जीवन की कामना के लिए किया जाता है। छठ पर्व में मुख्य सूर्य देव को अर्घ्य देने का सबसे ज्यादा महत्व माना गया है
संध्या अर्घ्य का समय
छठ पूजा पर सबसे महत्वपूर्ण दिन तीसरा यानी संध्या अर्घ्य माना जाता है। इस दिन संध्या अर्घ्य का होता है। इस दिन व्रती घाट पर आकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। वैंदिक पंचांग के अनुसार 27 अक्तूबर को सूर्योदय प्रातः 06:30 मिनट और सूर्यास्त शाम 05:40 मिनट पर होगा। इस दिन व्रती और भक्त किसी पवित्र नदी या तालाब मे कमर तक पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं
उगते सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व
छठ महापर्व का चौथा और आखिरी दिन कार्तिक माह की सप्तमी तिथि को होता है जिसमें इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण का होता है। 28 अक्तूबर 2025 को उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद ही 36 घंटे का व्रत समाप्त होता है। अर्घ्य देने के बाद व्रती प्रसाद का सेवन करके व्रत का पारण करती हैं।










