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Singrauli News -गूंज सिंगरौली की पत्रिका की खबर का बड़ा असर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लिया आधिकारिक संज्ञान, शिकायत मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फॉरवर्ड — पूर्व नोटिस के बावजूद ‘जहर उगलती’ त्रिमूला फैक्ट्री, लोगों के लिए नासूर बनी कंपनी पर हो सकती है बड़ी कार्यवाही

केंद्रीय स्तर से राज्य बोर्ड तक मामला पहुंचने के बाद त्रिमूला प्रबंधन पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है

गूंज सिंगरौली की पत्रिका कार्यालय बरगवां

सिंगरौली गोंदवाली स्थित त्रिमूला स्पंज इंडस्ट्रीज से निकल रहे कथित जहरीले काले धुएं के मुद्दे को गूंज सिंगरौली की पत्रिका द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। खबर और वीडियो वायरल होने के पश्चात मामला केंद्रीय स्तर तक पहुंचा, जहां केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज करते हुए इसे कार्रवाई हेतु मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को अग्रेषित कर दिया।

सीपीसीबी के जवाब में स्पष्ट उल्लेख है कि शिकायत को “concerned agency for action through Madhya Pradesh PCB” यानी मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से संबंधित एजेंसी को भेजा गया है। साथ ही शिकायत आईडी जारी कर यह संकेत दिया गया है कि मामला आधिकारिक रूप से पंजीकृत हो चुका है और अब राज्य स्तर पर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

केंद्रीय स्तर से राज्य स्तर तक पहुंचा मामला

इस घटनाक्रम से साफ है कि पहले शिकायत केंद्रीय मंच पर दर्ज हुई, उसके बाद उसे राज्य की सक्षम प्राधिकृत संस्था — मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड — को निरीक्षण, परीक्षण और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई के लिए सौंपा गया। अब आगे की कार्रवाई राज्य बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में है।

सूत्रों का कहना है कि विभागीय स्तर पर स्थल निरीक्षण, वायु गुणवत्ता परीक्षण और कंपनी के दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। यदि पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार नोटिस, आर्थिक दंड या अन्य कठोर कार्रवाई संभव है।

पूर्व में भी नोटिस, फिर भी नहीं थमा धुआं?

स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि कंपनी को पूर्व में भी नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई ठोस बदलाव नहीं दिखा। इसके बावजूद फैक्ट्री की चिमनियों से गुब्बारे की तरह उठता काला धुआं लगातार नजर आ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूर्व में निर्देश दिए गए थे, तो उनके पालन की प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हुई? क्या नोटिस केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहे?

लोगों के लिए नासूर बनी फैक्ट्री?

गोंदवाली, गोरबी रमपुरवा पड़री और नौढिया सहित आसपास के गांवों के लोगों का आरोप है कि कंपनी से निकलने वाला धुआं और उड़ती कोयला धूल उनके स्वास्थ्य और खेती दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।

सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और बच्चों में खांसी जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का कहना है कि फसलों पर काली परत जमने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों के शब्दों में, “यह फैक्ट्री अब इलाके के लिए नासूर बनती जा रही है।”

त्रिमूला प्रबंधन पर बढ़ा कानूनी और प्रशासनिक दबाव

केंद्रीय स्तर से राज्य बोर्ड तक मामला पहुंचने के बाद त्रिमूला प्रबंधन पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। यदि जांच में उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो कंपनी को कठोर दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

अब क्षेत्रवासियों की नजर इस बात पर है कि क्या इस बार कार्रवाई केवल औपचारिकता रहेगी या वास्तव में कोई ठोस और प्रभावी कदम उठाया जाएगा।गूंज सिंगरौली की पत्रिका इस जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है। जांच, निरीक्षण और संभावित कार्यवाही की हर आधिकारिक जानकारी पाठकों तक पहुंचाई जाती रहेगी।

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लाले विश्वकर्मा, "गूँज सिंगरौली की" डिजिटल न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक और संस्थापक सदस्य हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष एवं जनसेवा भाव से समाचार प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।

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