सीएम साहब! सिंगरौली में आबकारी तंत्र पर कब होगी बड़ी कार्रवाई? मोनार्क वाइंस और संजीव कुमार केसरी को लेकर उठे गंभीर सवाल अवैध शराब सप्लाई और ओवररेटिंग के आरोपों से गरमाया मामला, आबकारी अधिकारी सतीश कश्यप की निगरानी पर भी सवाल अब प्रदेश स्तर की जांच की मांग
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार नशे के खिलाफ सख्त संदेश देते रहे हैं।

गूंज सिंगरौली की पत्रिका
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार नशे के खिलाफ सख्त संदेश देते रहे हैं। ऐसे में सिंगरौली जिले में शराब कारोबार को लेकर सामने आ रही शिकायतों और आरोपों ने जिला आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि मोनार्क वाइंस से जुड़े शराब कारोबार में निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने, अवैध तरीके से शराब की सप्लाई किए जाने तथा नियमों की अनदेखी जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। अब इन शिकायतों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।
मोनार्क वाइंस के कारोबार को लेकर संजीव कुमार केसरी का नाम चर्चा में
स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे आरोपों में शराब ठेकेदार संजीव कुमार केसरी का नाम भी लिया जा रहा है। आरोप है कि मोनार्क वाइंस के नाम से संचालित शराब कारोबार के पीछे विभिन्न क्षेत्रों में शराब की सप्लाई और संचालन को लेकर उनकी भूमिका की चर्चा है कंचनी, परसौना, खुटार से लेकर बरगवां, गोरबी और चितरंगी क्षेत्र तक शराब की उपलब्धता को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है। इसलिए यह जरूरी है कि आबकारी विभाग और प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखे।
सबसे बड़ा सवाल अगर शिकायतें सही हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं?
जनता का सीधा सवाल है कि यदि शराब दुकानों या उनसे जुड़े नेटवर्क में ओवररेटिंग अथवा अवैध सप्लाई की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो विभाग द्वारा लगातार प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई दे रही 2025 में सिंगरौली की शराब दुकानों को लेकर बिना रेट सूची और MRP से अधिक कीमत वसूले जाने जैसी शिकायतों पर मीडिया रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई थी। उस रिपोर्ट में जिला आबकारी अधिकारी सतीश कश्यप का पक्ष भी लिया गया था, जिसमें उन्होंने QR स्कैनर संबंधी तकनीकी समस्या और उन्हें बदलने की बात कही थी अब सवाल यह है कि वर्तमान शिकायतों पर विभाग ने कितनी जांच की और कितनी कार्रवाई की?
आबकारी अधिकारी सतीश कश्यप की निगरानी पर भी सवाल
शराब कारोबार की निगरानी की जिम्मेदारी आबकारी विभाग की है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों ने जिला आबकारी अधिकारी सतीश कश्यप से जवाब मांगा है कि जिले में शराब की अवैध सप्लाई और ओवररेटिंग की शिकायतों पर विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है यदि शिकायतें गलत हैं तो विभाग को तथ्य सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि शिकायतों में सत्यता है तो जिम्मेदार लोगों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
कलेक्टर गौरव बैनल से भी जनता की उम्मीद
अब मामला जिला प्रशासन तक भी पहुंचने की मांग उठ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कलेक्टर गौरव बैनल पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराकर आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा कराएं जनता जानना चाहती है कि जिले में शराब की बिक्री और सप्लाई की वास्तविक स्थिति क्या है और शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
युवा पीढ़ी को लेकर बढ़ी चिंता
सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि अवैध शराब की सप्लाई अथवा नियम विरुद्ध बिक्री की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो इसका सबसे गंभीर प्रभाव युवा पीढ़ी पर पड़ सकता है लोगों की मांग है कि स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास विशेष जांच अभियान चलाया जाए तथा अवैध शराब की बिक्री या सप्लाई पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
सीएम साहब, अब सिंगरौली की बारी कब?
प्रदेश में मुख्यमंत्री स्तर से नशे के खिलाफ सख्त संदेश दिए जा रहे हैं। ऐसे में सिंगरौली की जनता का सवाल सीधा है क्या सिंगरौली की आबकारी व्यवस्था की भी प्रदेश स्तर से समीक्षा होगी?
क्या शराब कारोबार से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी
क्या यह पता लगाया जाएगा कि जिले में कहीं अवैध सप्लाई का नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या जिम्मेदार अधिकारी और संबंधित शराब कारोबारियों पर कार्रवाई होगी?
जनता चाहती है जांच, जवाब और कार्रवाई
मामले में अब सबसे जरूरी है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएं। यदि शिकायतें निराधार हैं तो संबंधित पक्ष को स्पष्ट रूप से अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है। वहीं यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
गूंज सिंगरौली की पत्रिका संबंधित पक्ष—मोनार्क वाइंस, शराब ठेकेदार संजीव कुमार केसरी, जिला आबकारी अधिकारी सतीश कश्यप तथा जिला प्रशासन—का पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित करेगी।
नोट: समाचार में उल्लिखित आरोप स्थानीय नागरिकों/सामाजिक संगठनों की शिकायतों एवं दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
















