कप्तान साहब! यह कैसा निर्देश? बरगवां में कबाड़ का कथित साम्राज्य, थाना प्रभारी अनिल पटेल पर उठे गंभीर सवाल—सीएम और डीजीपी के जीरो टॉलरेंस के दावों को खुली चुनौती बरगवां थाना क्षेत्र में जगह-जगह कबाड़ कारोबार का आरोप, ‘पटेल साहब के संरक्षण’ की चर्चाओं से माफियाओं के हौसले बुलंद! डीजल, रेत और कबाड़ के कथित गोरखधंधे से जनता बेहाल
प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और पुलिस मुख्यालय की ओर से अपराध एवं अवैध कारोबार पर सख्ती के निर्देश लगातार दिए जाते हैं,

सिंगरौली, मध्यप्रदेश।
प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और पुलिस मुख्यालय की ओर से अपराध एवं अवैध कारोबार पर सख्ती के निर्देश लगातार दिए जाते हैं, लेकिन सिंगरौली जिले के बरगवां थाना क्षेत्र में सामने आ रहे कथित अवैध कबाड़ कारोबार को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में जगह-जगह कबाड़ का कारोबार संचालित होने की चर्चाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बरगवां थाना क्षेत्र में कबाड़ कारोबार तेजी से फैल रहा है और कई स्थानों पर नियम-कायदों की अनदेखी किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप यह भी हैं कि कारोबारियों को पुलिस कार्रवाई का भय नहीं है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
‘पटेल साहब का आशीर्वाद’—चर्चा सच या सिर्फ अफवाह?
बरगवां थाना प्रभारी अनिल पटेल को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों के बीच कथित रूप से यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर कबाड़ कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
यदि अवैध कारोबार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो क्या थाना स्तर पर कार्रवाई नहीं हो रही, या कार्रवाई के पीछे कोई और वजह है? यही सवाल अब कप्तान साहब से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंच रहा है यह स्पष्ट करना जरूरी है कि थाना प्रभारी अनिल पटेल पर लगाए जा रहे किसी भी व्यक्तिगत आरोप की सत्यता संबंधित जांच के बाद ही तय हो सकती है।
कबाड़ की आड़ में चोरी के माल का खेल?
स्थानीय सूत्रों के हवाले से आरोप लगाए जा रहे हैं कि चोरी की आशंका वाले सामान, वाहन पार्ट्स, मशीनरी, पाइप, मोटर और लोहे की सामग्री को कबाड़ के रूप में खपाए जाने की संभावना है अगर ऐसा हो रहा है तो मामला केवल कबाड़ कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चोरी के माल की खरीद-फरोख्त और आपराधिक नेटवर्क की जांच का विषय बन सकता है।
डीजल, रेत और कबाड़—बरगवां में किसकी चल रही है?
क्षेत्र में डीजल, रेत और कबाड़ कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आम जनता यह पूछ रही है कि आखिर जिम्मेदार विभागों की नजर इन गतिविधियों पर क्यों नहीं पड़ रही एक तरफ सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है, दूसरी तरफ जमीन पर अवैध कारोबार की शिकायतें क्यों सुनाई दे रही हैं?
कप्तान साहब! अब जवाब कार्रवाई से चाहिए
स्थानीय लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। कबाड़ कारोबारियों के दस्तावेज, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड, माल के स्रोत और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच हो यदि आरोप निराधार हैं तो जांच से स्थिति साफ हो जाएगी और यदि शिकायतों में सच्चाई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
सीएम साहब और डीजीपी साहब के निर्देशों का बरगवां में कितना असर?
कप्तान साहब से सीधा सवाल—जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अवैध कारोबार पर सख्ती के निर्देश दे रहे हैं, तो बरगवां थाना क्षेत्र में कथित कबाड़ कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों पर निर्णायक कार्रवाई कब होगी?
जनता जवाब नहीं, अब कार्रवाई देखना चाहती है।
शेष अगले अंक में
















