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सिंगरौली खण्ड स्तरीय जल जीवन मिशन के कार्यो की प्रगति नगण्य होने पर मुख्य अभियंता के द्वारा की गई थी कार्रवाई

आरोपो में घिरे निलंबित कार्यपालन यंत्री 13 दिनों में बहाल

आरोपो में घिरे निलंबित कार्यपालन यंत्री 13 दिनों में बहाल

सिंगरौली खण्ड स्तरीय जल जीवन मिशन के कार्यो की प्रगति नगण्य होने पर मुख्य अभियंता के द्वारा की गई थी कार्रवाई

सिंगरौली । लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पदस्थ कार्यपालन यंत्री त्रिलोक सिंह बरकड़े का निलंबन एवं उसके ठीक 13 दिन बाद बहाली सवालों के घेेरे में आ गई है। 13 दिनों के अंदर ऐसा क्या हुआ कि कार्यपालन यंत्री को बहाल कर सिंगरौली पदस्थ कर दिया गया। हालांकि निलंबन के पूर्व बरकड़े के पास सिंगरौली का अतिरिक्त प्रभार था।

दरअसल लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री त्रिलोक सिंह बरकड़े 24 अप्रैल के पूर्व तक सीधी में पदस्थ थे और इस दौरान कार्यपालन यंत्री बरकड़े के पास सिंगरौली का अतिरिक्त प्रभार था। 22 अप्रैल 2025 को जल जीवन मिशन एवं विभागीय कार्यो की समीक्षा बैठक भोपाल स्तर से की गई थी। जिसमें त्रिलोकी सिंह बरकड़े प्रभारी कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खण्ड सिंगरौली द्वारा जल जीवन मिशन के कार्यो की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की गई। जल जीवन मिशन के कार्यो यथा-एफएचटीसी, हर घर जल योजना के ग्राम पंचायतों के हस्तांतरण तथा अनुबंध अवधि समाप्त होने के उपरांत भी योजनाएं पूर्ण किये जाने संबंधी कार्यो की प्रगति नगण्य रही है। जिसके कारण कार्यपालन यंत्री त्रिलोकी सिंह पीएचई सीधी एवं प्रभारी कार्यपालन यंत्री अतिरिक्त सिंगरौली को 24 अप्रैल को मुख्य अभिंयता कार्यालय भोपाल से निलंबित कर दिया गया। लेकिन हैरानी की बात है कि कार्यपालन यंत्री बरकड़े ने निलंबन के विरूद्ध अभ्यावेदन प्रस्तुत कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करते हुये निलंबन से बहाल किये जाने का आग्रह किया था। जहां उक्त अभ्यावेदन पर विचार उपरांत अवर सचिव म.प्र. शासन पीएचई भोपाल के द्वारा 7 मई को बहाल कर सिंगरौली खण्ड में पदस्थ कर दिया गया। अब सवाल उठ रहा है कि जिन योजनाओं के कार्यो की प्रगति पिछले कई सालों से नगण्य रही, वह 13 दिनों के अंदर कैसे ठीक-ठाक हो गया। कार्यपालन यंत्री 13 दिनों के अंदर बहाली किये जाने को लेकर प्रदेश सरकार एवं पीएचई के कुछ अधिकारी के साथ-साथ मंत्री भी सवालों के कटघर्रे में आ गये। वही सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि कार्यपालन यंत्री बरकड़े को सीधी-सिंगरौली में ही क्यों पदस्थ किया जाता है और जब निलंबन के पूर्व सीधी के साथ-साथ सिंगरौली का प्रभार था, फिर बहाली के बाद सिंगरौली में पदस्थापना क्यों की गई। हालांकि इसका जवाब विभागीय उच्च अधिकारी भी नही दे पा रहे हैं।

प्रभारी मंत्री के विभाग का है मसला

प्रदेश सरकार के केबिनेट लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग म.प्र. शासन भोपाल सम्पतिया उईके विभाग का यह मसला है। पीएचई मंत्री को सिंगरौली के प्रभारी मंत्री भी हैं। जहां इन दिनों पीएचई विभाग चर्चाओं में बना हुआ है। वही सीधी से निलंबित निलंबित कार्यपालन यंत्री बरकड़े को 13 दिन के अंदर बहाल कर सिंगरौली खण्ड का जिम्मा सौप दिया जाए , यह चर्चा का विषय बना हुआ है। आखिर कार इस बात की चर्चाएं हो रही हैं कि निलंबित कार्यपालन यंत्री कौन ऐसा जादू किया कि एक खुद के अभ्यावेदन में सब कुछ ठीक-ठाक हो गया। कहीं न कहीं विपक्षी दलों को सरकार के खिलाफ बोलने के लिए मौका जरूर मिल गया है।

मंत्री ने भीषण गर्मी में भी नही किया था पेयजल की समीक्षा

जिले में इस वर्ष गर्मी के महीने में पेयजल की भारी किल्लत रही है। कई गांवों के हैंडपंप व राईजर पाईप के अभाव से ड्राई हो गये थे। भू-जल स्तर नीचे खिसकने के कारण जिले के कई गांवों में बाल्टी भर पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची थी। हालांकि कलेक्टर चन्द्रशेखर शुक्ला पेयजल समस्या को लेकर गंभीर थे और जानकारी मिलने पर संबंधित गांव में टीम भेजकर बिगड़े हैंडपंपों का मरम्मत एवं टैंकरों से पेयजल की आपूर्ति भी कराया। वही 18 एवं 19 मई को दो दिवसीय पीएचई एवं जिले के प्रभारी मंत्री का दौरा हुआ था। लेकिन उन्होंने अपने विभाग की समीक्षा नही की। जिले में पेयजल की स्थिति क्या है, उस पर चर्चा करना ही उचित नही समझा था। उसके पीछे कारण बरकड़े हो सकते हैं।

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लाले विश्वकर्मा, "गूँज सिंगरौली की" डिजिटल न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक और संस्थापक सदस्य हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष एवं जनसेवा भाव से समाचार प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।

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