महान नदी में रेत माफियाओं का तांडव!,बीच धारा में मशीनों से अवैध उत्खनन, एनजीटी नियमों को खुली चुनौती,खनिज विभाग की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
आरोप है कि खदान का संचालन कर रही सहकार ग्लोबल लिमिटेड द्वारा स्वीकृत क्षेत्र से बाहर बड़े पैमाने पर रेत निकासी की जा रही है

गूंज सिंगरौली की पत्रिका कार्यालय बरगवां सिंगरौली
सिंगरौली। जिले में अवैध रेत उत्खनन का खेल अब खुलेआम कानून को चुनौती देता नजर आ रहा है। देवसर तहसील अंतर्गत कारी रेत खदान में इन दिनों माफियाओं का दबदबा चरम पर बताया जा रहा है। आरोप है कि खदान का संचालन कर रही सहकार ग्लोबल लिमिटेड द्वारा स्वीकृत क्षेत्र से बाहर बड़े पैमाने पर रेत निकासी की जा रही है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि खदान क्षेत्र के सीमांकन चिन्ह तक मिटा दिए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि वैध खनन क्षेत्र कहां तक है। इस स्थिति का फायदा उठाकर अलग-अलग स्थानों पर मनमाने ढंग से उत्खनन किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर खनन नियमों का उल्लंघन है।
बीच धारा में मशीनों का कहर
सबसे गंभीर आरोप यह है कि महान नदी की मुख्य जलधारा में भारी पोकलेन और जेसीबी मशीनें उतारकर रेत निकाली जा रही है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों के अनुसार नदी की सक्रिय जलधारा में मशीनों से खनन पूर्णतः प्रतिबंधित है, ताकि नदी का प्राकृतिक संतुलन और जलीय जीवन सुरक्षित रहे।
इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर खुलेआम उत्खनन किया जाना पर्यावरणीय मानकों पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
नदी का स्वरूप बिगड़ने का खतरा
स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि अंधाधुंध खनन से नदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है। इससे जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर खतरा मंडरा सकता है। यदि स्थिति पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले वर्षों में नदी के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर नुकसान हो सकता है।
खनिज विभाग और प्रशासन पर सवाल
इतने गंभीर आरोपों के बावजूद खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की चुप्पी चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, खदान क्षेत्र के पुनः सीमांकन और अवैध उत्खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इन आरोपों की जांच कर सख्त कार्रवाई करता है या नहीं।
शेष अगले अंक में….















