मध्य प्रदेशसिंगरौली

Singrauli News – कप्तान साहब! यह कैसा निर्देश? गोरबी सोलंग मोड़ पर कबाड़ का काला साम्राज्य, ‘CID’ साहब कहे जाने वाले चौकी प्रभारी की चुप्पी पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन दुकानों के खुलते ही इलाके में चोरियों का ग्राफ आसमान छूने लगा है

सिंगरौली  रिपोर्ट : विशेष संवाददाता

सिंगरौली कहते हैं “जहाँ चौकी मजबूत होती है, वहाँ चोर कमजोर होते हैं”… लेकिन गोरबी चौकी क्षेत्र में यह कहावत उलटी क्यों साबित हो रही है? यह सवाल आज पूरे इलाके में आग की तरह फैल चुका है। गोरबी सोलंग मोड़ के पास, चौकी से महज करीब 900 मीटर की दूरी पर संचालित हो रही कबाड़ की दुकानें आज सिर्फ दुकान नहीं, बल्कि अवैध कारोबार का अड्डा बनती जा रही हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन दुकानों के खुलते ही इलाके में चोरियों का ग्राफ आसमान छूने लगा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खामोशी। परियोजनाएं, कंपनियां और चोरी की कड़ी गोरबी क्षेत्र कोई साधारण इलाका नहीं है। यहां आसपास नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) और एनटीपीसी जैसी बड़ी औद्योगिक परियोजनाएं मौजूद हैं।

स्थानीय सूत्रों की मानें तो जैसे ही किसी क्षेत्र में ऐसी परियोजनाएं आती हैं, कबाड़ की दुकानें अपने आप उग आती हैं। और फिर शुरू होता है लोहे, केबल, स्क्रैप, मशीन पार्ट्स की चोरी का सिलसिला।

सवाल सीधा है—

बिना संरक्षण के क्या इतना बड़ा नेटवर्क चल सकता है?
‘दिलीप कबाड़ी’ और सवालों के घेरे

इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि दिलीप कबाड़ी नामक व्यक्ति ने गोरबी क्षेत्र में कबाड़ियों का पूरा साम्राज्य खड़ा कर दिया है।
सूत्र बताते हैं कि एनसीएल सहित अन्य औद्योगिक इकाइयों और आसपास की छोटी-बड़ी कंपनियों में हो रही चोरियों के तार कहीं न कहीं कबाड़ की दुकानों से जुड़ते दिखते हैं।

अब बड़ा सवाल यह है

क्या चोरी का माल ठिकाने लगाने के लिए इससे सुरक्षित जगह कोई और हो सकती है?
एक ही चौकी क्षेत्र में चोरी, एक ही क्षेत्र में माल खपाने का खेल
अपराध शास्त्र भी कहता है—
“चोर वही वारदात करता है जहाँ उसे डर न हो।”
तो फिर गोरबी चौकी क्षेत्र में ही चोरी, और उसी क्षेत्र में कबाड़ में माल खपाने की हिम्मत कैसे?
क्या यह पुलिस की उदासीनता है या फिर संरक्षण का कवच?
स्थानीय लोगों के बीच एक तंज भरी कहावत अब आम हो चली है—

यहाँ चोरी करने से पहले चोर नहीं, पुलिस का मूड देखा जाता है।”

‘CID’ कहे जाने वाले चौकी प्रभारी पर खुला आशीर्वाद?
इलाके में चौकी प्रभारी को लोग ‘CID’ कहकर पुकारते हैं।
क्यों?क्योंकि लोगों का कहना है कि सब कुछ दिखता है, फिर भी कुछ नहीं दिखता।
अब यह चर्चा सड़क से लेकर चाय की दुकानों तक गूंज रहा है—
“अगर CID साहब चाह लें, तो एक रात में खेल खत्म…
और अगर न चाहें, तो कबाड़ का साम्राज्य सलामत।”
कार्रवाई न होना, छापेमारी का अभाव, और लगातार बढ़ती चोरियां अपने आप में खुले आशीर्वाद की कहानी कह रही हैं—ऐसा स्थानीय लोग कहते हैं।
फिर क्यों नहीं रुक रहीं चोरियां?
कानून कहता है

अवैध कारोबार पर अंकुश लगाना पुलिस चौकी की जिम्मेदारी है।

तो फिर सवाल उठता है छापे क्यों नहीं पड़ते? कबाड़ दुकानों की जांच क्यों नहीं होती चोरी के मामलों में बड़ी गिरफ्तारी क्यों नहीं लोगों का सीधा आरोप है कि यदि मिलीभगत नहीं है, तो यह नाकामी क्यों जनता का सीधा सवाल कप्तान साहब से
अब गोरबी की जनता पूछ रही है
कप्तान साहब, यह कैसा निर्देश है क्या कबाड़ का यह काला साम्राज्य यूं ही फलता-फूलता रहेगा या फिर किसी दिन CID का चश्मा सच में काम करेगा जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते,तब तक यह खबर सिर्फ खबर नहीं, एक खुली चेतावनी है।

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लाले विश्वकर्मा, "गूँज सिंगरौली की" डिजिटल न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक और संस्थापक सदस्य हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष एवं जनसेवा भाव से समाचार प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।

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