Singrauli News – सिंगरौली में शराब माफिया द्वारा बाइक पर पेटियां लादकर गांव-गांव सप्लाई हो रही शराब, सोशल मीडिया पर फोटो वायरल
शराब माफिया प्रशासन की नाकामी से युवाओं का भविष्य खतरे में...

By राज कुमार कुशवाहा
सिंगरौली, मध्य प्रदेश की ऊर्जा राजधानी कही जाने वाली सिंगरौली जिले में इन दिनों शराब माफियाओं का आतंक अपने चरम पर है। जिले के बैढ़न थाना क्षेत्र से आ रही तस्वीरो में साफ है कि क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब कारोबार अब खुलेआम सोशल मीडिया का सहारा लेकर फल-फूल रहा है।
हाल ही में सामने आए एक वाफोयरल टो ने न सिर्फ प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर किया,

बल्कि यह भी दिखा दिया कि किस तरह यह धंधा अब बेखौफ तरीके से चल रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि रंग-बिरंगे कपड़े पहने युवक बाइक पर शराब की पेटियां लादे हुए गांव-गांव में सप्लाई करते नजर आ रहे हैं। यहां का सबसे बड़ा शराब समूह अब खुलेआम अवैध शराब की पैकारी में जुटा हुआ है। इन माफियाओं की दबंगई का आलम यह है कि
शराब की बिक्री अब बगैर किसी डर के बाइक पर लादकर गांव-गांव खुलेआम की जा रही है।
प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन जहां एक ओर शराब माफियाओं पर नकेल कसने के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। सिंगरौली जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की अवैध बिक्री ने युवाओं और बच्चों को नशे की गर्त में धकेलना शुरू कर दिया है।
थाने में दर्ज हुआ मामला, लेकिन माफिया बेखौफ…

गौरतलब है कि 18 अप्रैल 2025 की रात को बैढ़न थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिलौजी निवासी रामनरेश शाह ने थाने में शिकायत दर्ज कराई कि रात लगभग 9:30 बजे के आसपास शराब दुकान के पास प्रिंस गुप्ता, मुन्ना यादव और संजू गुप्ता ने पैसे के लेनदेन और शराब बिक्री को लेकर विवाद किया। जब रामनरेश ने इसका विरोध किया तो इन तीनों ने उस पर हाथापाई शुरू कर दी। मौके पर जब शोर मचा तो अंकित शाह और अखिलेश शाह ने बीच-बचाव किया और पूरे घटनाक्रम के चश्मदीद भी बने। इस मामले में पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 115 (2) के तहत मामला दर्ज किया है, लेकिन अब तक माफियाओं के खिलाफ कोई प्रभावशाली कार्यवाही नहीं हो सकी है।
बिना आईडी के बाहरी लोग चला रहे अवैध शराब का धंधा..
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि शराब माफिया सिंगरौली जिले के नहीं हैं, बल्कि बाहर से आकर यहां गलियों गावो में अवैध धंधा चला रहे हैं। इनकी कोई वैध पहचान या स्थायी पते की जानकारी पुलिस के पास मौजूद नहीं है। बावजूद इसके, ये लोग गांव-गांव बिना नंबर प्लेट वाली बाइकों से शराब पहुंचाते हैं। युवाओं और स्कूली बच्चों को सस्ती शराब उपलब्ध कराकर उन्हें नशे का आदी बनाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन माफियाओं के पीछे कुछ रसूखदार लोगों और अधिकारियों का संरक्षण भी है, जिससे इन पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से फेल?

सवाल उठता है कि जब ये सब खुलेआम हो रहा है, तो पुलिस और प्रशासन आंख मूंदे क्यों बैठा है? क्या कार्रवाई सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई है? या फिर वाकई में प्रशासन की मिलीभगत के कारण ही माफिया इतने बेखौफ हो चले हैं? सरकारी शराब दुकानों से निकलकर गांव तक पहुंच रही यह अवैध शराब एक साजिश के तहत युवाओं को बर्बादी की ओर ले जा रही है।
जिले में कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाया जा रहा है और प्रशासन महज मूकदर्शक बना हुआ है-
जहा ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों की मांग है कि इन शराब माफियाओं के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। बाहरी लोगों की पहचान की जाए, बिना आईडी वालों को जिले से बाहर निकाला जाए और जिस शराब समूह के संरक्षण में ये सब हो रहा है, उसे चिन्हित कर कानूनी शिकंजे में लिया जाए। यदि प्रशासन समय रहते कठोर कदम नहीं उठाता, तो आने वाले समय में सिंगरौली जिले में नशे की यह आग और अधिक विकराल रूप ले सकती है।















