नवानगर थाने की पोल खुली: स्टाफ गायब, कुर्सियां खाली पुलिस विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
विभाग की कार्यवाहियां, तबादले, पोस्टिंग एवं अन्य गतिविधियां हमेशा सुर्खियों में रहती हैं।

By लाले विश्वकर्मा
विभाग की कार्यवाहियां, तबादले, पोस्टिंग एवं अन्य गतिविधियां हमेशा सुर्खियों में रहती हैं। यहां तो पुलिसकर्मियों की स्थिति यह है कि वे एक ही थाना क्षेत्र या पुलिस चौकी में वर्षों से जमे हुये हैं।
एक दो महीना, छः महीने के लिए कहीं हटे तो पुनः पुराने स्थान पर पोस्टिंग हो जाती है। ऐसे कई दृष्टांत सिंगरौली जिले के थानों एवं चौकियों में पाये जाते हैं। योग्य कर्मचारी लूप लाईन में धूल फांक रहे हैं
तो नेताओं की चमचागिरी करने वाला प्रभारी बनकर बैठा रहता है
इतना ही नहीं पुलिस विभाग की कई गतिविधियां चौकानें वाली भी होती हैं। 25 अप्रैल 2025 की शाम छः बजे से लेकर साढ़े छः बजे तक जब थानों में गिनती होती है और काम बांटे जाते हैं उस समय महत्वपूर्ण पुलिस थाना नवानगर में आधे घंटे तक एक भी कर्मचारी नजर नहीं आया।
पूरे थाने में सारी कुर्सियां खाली मिलीं सारे कमरे खुले मिले
रजिस्टर एवं अन्य दस्तावेज टेबुलों पर पड़े थे और थाना प्रभारी के चैम्बर की कुण्डी बाहर से लगी हुयी थी। वे भी थाने में मौजूद नहीं थे। प्रत्यक्षदर्शी ने देखा कि एक सोलह सत्रह साल का लड़का हाल में बैठा हुआ है। उससे जब पूछा गया कि तुम कौन हो? बांकी लोग कहां हैं तो उसने जानकारी दी कि उसे कम्प्यूटर में स्कैन करने के लिए बुलाया गया
स्टाफ कहां गया है यह जानकारी उसे नहीं थी
प्रत्यक्षदर्शी आध घंटे यानि साढ़े छः बजे तक थाने के परिसर में चबूतरे पर लगी कुर्सी पर बैठा रहा। आधे घंटे बाद एक मोटरसायकिल से एक कर्मचारी थाना परिसर में आया। उससे जब यह पूछा गया कि पूरा थाना खाली क्यों है? तो उसने जवाब दिया कि मैं हूं ना, शायद वह कान्स्टेबुल था। प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि रिपोर्ट लिखो, उसने कहा कि आप इंतजार कीजिये मुंशी जी आते होंगे।
नवानगर थाने के थाना प्रभारी डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह हैं। सिंह साहब शायद पीएचडी हैं। पीएचडी चिंतक होता है। नयी खोज करता है। हो सकता है कि सिंह साहब का कन्सन्ट्रेशन थाने से हटकर
थाना-नवानगर जिला-सिंगरौली (म.प्र.)
कहीं और हो इसलिए थाने में तैनात महकमें के कर्मचारियों की गतिविधियों पर उनकी पैनी नजर न हो पाती हो। पुलिस विभाग की कारगुजारियों की फेहरिस्त बहुत लम्बी है। बताते हैं कि एक एएसआई के नाम पर एनटीपीसी में आवास बुक है। लेकिन वो वहां नहीं रहता है उसने अपने नाम पर बुक आवास को किसी ठेकेदार को किराये पर दे रखा है। मजे की बात यह है कि जिले के पुलिस महकमें के आला अधिकारी से लेकर चौकी प्रभारी तक एनटीपीसी की आवास की सेवा ले रहे हैं। क्या उन्हें इस तरह के वारदात की जानकारी नहीं होती। बहरहाल प्रत्यक्षदर्शी किसी जिम्मेदार जवाबदेह के अभाव में थाने से वापस आ गया।















