Singrauli News – महिला प्रधान आरक्षक से अधिवक्ता और HCM ने की अभद्रता, 10 दिन बाद भी नहीं हुई कार्रवाई — पीड़िता बोली “न्याय नहीं मिला तो करूंगी आत्महत्या
सिंगरौली जिले के बैढ़न कोतवाली में तैनात एक महिला प्रधान आरक्षक से अधिवक्ता द्वारा की गई अभद्रता और कोतवाली में पदस्थ हेड कांस्टेबल महोदय (HCM) द्वारा अशोभनीय व्यवहार का मामला सामने आया

By कार्यालय, सिंगरौली L……
सिंगरौली जिले के बैढ़न कोतवाली में तैनात एक महिला प्रधान आरक्षक से अधिवक्ता द्वारा की गई अभद्रता और कोतवाली में पदस्थ हेड कांस्टेबल महोदय (HCM) द्वारा अशोभनीय व्यवहार का मामला सामने आया है। यह घटना 17 जून की है, लेकिन पीड़िता के शिकायत करने के बाद भी 10 दिन बीत जाने के बावजूद कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है, जिससे आहत महिला प्रधान आरक्षक ने आत्महत्या करने की चेतावनी दी है।
घटना का पूरा विवरण:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 17 जून 2025 को लगभग शाम 4 बजे, महिला प्रधान आरक्षक सोहगिया पटेल किसी मामले की विवेचना के लिए सब्जी मंडी, बैढ़न जा रही थीं। दुर्गा मंदिर के पास स्थित बॉस बर्तन के सामने से गुजरते समय अधिवक्ता दिलीप बिंद का हाथ झटका खाकर उनके पेट से छू गया। महिला आरक्षक ने इसे नजरअंदाज कर दिया, लेकिन अचानक अधिवक्ता ने पलटकर उन्हें अश्लील गालियाँ देते हुए बर्दी उतरवाने की धमकी दे डाली।
वहाँ मौजूद सब्जी विक्रेताओं ने बीच-बचाव किया –
महिला आरक्षक ने तत्काल कोतवाली टीआई को फोन लगाया, लेकिन कॉल नहीं लगा। इसके बाद HCM को सूचना दी गई, जिसके बाद PCR वैन पहुंची और आरक्षक सुरेंद्र भुजवा तथा संजीत कोल के साथ महिला आरक्षक को कोतवाली लाया गया।
कोतवाली में भी हुआ दुर्व्यवहार:
कोतवाली पहुंचने के बाद उप निरीक्षक उदयचंद करिहार ने HCM अवध सोनी से दिलीप बिंद का मेडिकल फार्म भरने को कहा, लेकिन फार्म नहीं भरा गया। इसके बाद जब महिला प्रधान आरक्षक ने बाहर आकर देखा कि दिलीप बिंद को कुर्सी पर बिठाकर मेहमान जैसा व्यवहार किया जा रहा है, तो उन्होंने HCM अवध सोनी को फोन कर नाराजगी व्यक्त की। इस पर HCM ने भी उन्हें माँ-बहन की गालियाँ दीं और गमला उठाकर मारने की धमकी दी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों – ASI पप्पू सिंह, सजीत सिंह, SI प्रियंका मिश्रा, रूपा अग्निहोत्री, और वंदना तिवारी – ने बीच-बचाव कर किसी तरह मामला शांत किया।
मानसिक आघात से बेहोश होकर गिर पड़ीं महिला प्रधान आरक्षक:
लगातार मानसिक उत्पीड़न और अपमानजनक व्यवहार से आहत होकर महिला प्रधान आरक्षक सोहगिया पटेल बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ीं। वहाँ मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें पानी पिलाया, तब जाकर उन्हें होश आया।
पुलिस प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल:
महिला प्रधान आरक्षक ने स्पष्ट कहा है कि टीआई को जानकारी देने के बावजूद ना तो दिलीप बिंद के खिलाफ कोई दोष निकाला गया और ना ही अब तक कोई कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेंगी, और इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और पुलिस प्रशासन की होगी।
उन्होंने कोतवाली प्रभारी को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। बताया जा रहा है कि पूरे घटनाक्रम की पुष्टि कोतवाली के सीसीटीवी फुटेज से की जा सकती है।
प्रशासन का पक्ष:
इस मामले पर CSP विंध्यनगर पी.एस. परस्ते ने कहा है कि महिला प्रधान आरक्षक के आवेदन की जांच की जा रही है और सभी संबंधित व्यक्तियों के बयान लिए जा रहे हैं।
मऊगंज, सतना और इंदौर जैसी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक?
यह गंभीर सवाल सिंगरौली पुलिस प्रशासन के सामने है। मऊगंज, सतना और इंदौर जिलों में हाल ही में पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों और दुर्व्यवहार की घटनाओं के बावजूद भी बैढ़न कोतवाली में महिला कर्मियों के साथ ऐसे बर्ताव पर पुलिस की चुप्पी हैरान करने वाली है।
यदि महिला पुलिसकर्मी सुरक्षित नहीं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी कैसे?
सवाल यह भी उठता है कि जब कानून की रक्षा करने वाले पुलिस कर्मियों को ही न्याय नहीं मिल पा रहा है, तो आम नागरिकों की उम्मीदें कैसे पूरी होंगी? महिला प्रधान आरक्षक के साथ यह व्यवहार न सिर्फ एक व्यक्ति विशेष का मामला है, बल्कि यह पूरे पुलिस सिस्टम की संवेदनहीनता और पक्षपात को उजागर करता है।















