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2025 छठ पूजा कैलेण्डर, इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त

By सोनू विश्वकर्मा

छठ पूजा का पर्व भगवान सूर्य को समर्पित है। छठ पूजा के चार दिनों में भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। छठ पूजा का व्रत मुख्य रूप से स्त्रियाँ अपने पुत्रों की कुशलता एवं परिवार की प्रसन्नता के लिये करती हैं। छठ पूजा मुख्य रूप से भारत के बिहार राज्य एवं उससे सटे नेपाल में मनायी जाती है।

सूर्य देव की पूजा चार दिनों तक की जाती है। छठ के प्रथम दिन को नहाय खाय के नाम से जाना जाता है। इस दिन पवित्र जल में, विशेषतः गङ्गा नदी में डुबकी लगायी जाती है। छठ व्रत का पालन करने वाली स्त्रियाँ इस दिन केवल एक समय भोजन करती हैं।

छठ के दूसरे दिन को खरना के नाम से जाना जाता है। इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्जला व्रत किया जाता है। सूर्यास्त के तुरन्त पश्चात, सूर्य देव को भोजन अर्पित करने के उपरान्त व्रत का पारण किया जाता है। दूसरे दिन प्रसाद ग्रहण करने के पश्चात तीसरे दिन का व्रत आरम्भ होता है।

छठ पूजा के तीसरे मुख्य दिवस पर सम्पूर्ण दिन निर्जला व्रत किया जाता है। अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देना इस दिन का प्रमुख अनुष्ठान होता है। यह वर्ष का एकमात्र समय है, जब अस्त होते सूर्य को अर्घ्य अर्पण किया जाता है। तीसरे दिन का उपवास पूर्ण रात्रि पर्यन्त रहता है तथा अगले दिन सूर्योदय के उपरान्त पारण किया जाता है।

छठ के चौथे एवं अन्तिम दिवस पर, उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पण किया जाता है तथा इसे उषा अर्घ्य के नाम से जाना जाता है। सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात, 36 घण्टे का उपवास पूर्ण किया जाता है।

  • 25 अक्टूबर, शनिवार : नहाय-खाय
  • 26 अक्टूबर, रविवार : खरना 2025
  • 27 अक्टूबर, सोमवार : अस्ताचलगामी भगवान भाष्कर को संध्याकालीन अर्घ्य
  • 28 अक्टूबर, मंगलवार : उदीयमान सूर्य को प्रात:कालीन अर्घ्य अर्पण

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लाले विश्वकर्मा, "गूँज सिंगरौली की" डिजिटल न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक और संस्थापक सदस्य हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष एवं जनसेवा भाव से समाचार प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।

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