मध्य प्रदेशसिंगरौली

Singrauli News – सिंगरौली में कानून बंधक: 20 लाख की वसूली, पिटाई और कोतवाली की संदिग्ध भूमिका — थाना प्रभारी पर उठे गंभीर सवाल एसपी के हस्तक्षेप के बाद हरकत में आई पुलिस, वरना मामला दबाने की थी पूरी तैयारी!

शनिवार की शाम घटी इस घटना ने न केवल पुलिस की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया है

By लाले विश्वकर्मा

सिंगरौली शहर की कोतवाली पुलिस एक बार फिर विवादों के घेरे में है। शनिवार की शाम घटी इस घटना ने न केवल पुलिस की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि सिंगरौली में “कानून” अब पैसे और पहुंच के आगे नतमस्तक होता जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, एनसीएल परियोजना अमलोरी में कार्यरत कलिंगा ओबी कंपनी के सहायक प्रबंधक हेमंत डाकुओं और एक अन्य कर्मचारी को कुछ वसूलीबाजों ने ट्रामा सेंटर के पास बुलाया और फिर बंद कमरे में बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा।

बताया जा रहा है कि आरोपियों ने 20 से 30 लाख रुपये की मांग की थी। जब कंपनी के प्रतिनिधियों ने इंकार किया तो उन्हें लाठी-डंडों से पीटकर घायल कर दिया गया।

पुलिस ने पहले छोड़ा, फिर पकड़ा — थाने में ‘लेन-देन’ की बू

घटना की शिकायत कोतवाली में दोपहर में दर्ज कराई गई थी, लेकिन पुलिस ने शाम तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, थाना प्रभारी अशोक सिंह परिहार ने आरोपियों को पूछताछ के नाम पर बुलाकर छोड़ दिया।

सवाल यह है कि

  • जब शिकायत दर्ज नहीं थी, तो पुलिस ने किन आधारों पर आरोपियों को थाने बुलाया?
  • और यदि बुलाया था, तो फिर छोड़ा क्यों गया?
  • यह पूरा घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि थाने में पहले “रफादफा” करने की कोशिश की जा रही थी।
  • एसपी के सख्त निर्देश के बाद ही हरकत में आई पुलिस

जब मामला एसपी सिंगरौली के पास पहुंचा, तब जाकर रात करीब 12 बजे पुलिस ने सक्रियता दिखाई और यूपी के सोनभद्र जिले के भरुआ थाना क्षेत्र से गुड्डू सिंह, अंकित सिंह, डब्बू सिंह सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर एसपी का हस्तक्षेप न होता, तो शायद यह मामला भी दूसरे कई मामलों की तरह “फाइलों में दब जाता।”

  • थाना प्रभारी की भूमिका पर सवाल निष्पक्षता या मिलीभगत?
  • थाना प्रभारी अशोक सिंह परिहार का कहना है कि “शिकायत ही नहीं आई थी, इसलिए कार्रवाई नहीं हुई।”
  • लेकिन सवाल ये उठता है

जब शिकायत नहीं थी तो पुलिस ने किन सूचना स्रोतों के आधार पर आरोपियों को बुलाया?
क्या यह साबित नहीं करता कि पुलिस सब जानती थी, पर हाथ नहीं डाल रही थी?

सूत्रों का कहना है कि थाना प्रभारी का रवैया ‘प्रभावशाली लोगों’ के दबाव में था।
घटना की गंभीरता के बावजूद पुलिस ने “अपहरण और बंधक बनाकर मारपीट” जैसी धाराएँ नहीं लगाईं, बल्कि सिर्फ धमकी और वसूली की धाराओं में मामला दर्ज किया गया।

सवालों के घेरे में सिंगरौली पुलिस की साख लोग अब पूछ रहे हैं

क्या सिंगरौली में न्याय अब सिर्फ पैसे और पहुंच वालों के लिए है?”
“क्या पुलिस अब अपराधियों से ज्यादा ‘सेटिंग’ में व्यस्त है?”

  • सिस्टम की सच्चाई यही है कि
  • ईमानदारी अब सिर्फ कागजों में बची है,और इंसाफ फाइलों में दम तोड़ रहा है।”
  • जनता का विरोध: थाना प्रभारी के निलंबन की मांग
  • स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले को लेकर थाना प्रभारी अशोक सिंह परिहार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब पुलिस जनता की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती, तो ऐसे अधिकारी थाने में बने रहने के लायक नहीं। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा

कोतवाली में हर केस पैसे और पहुंच का खेल बन चुका है।
जब तक ऐसे अफसरों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती,
तब तक सिंगरौली में अपराधी बेलगाम रहेंगे

GSK NEWS

लाले विश्वकर्मा, "गूँज सिंगरौली की" डिजिटल न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक और संस्थापक सदस्य हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष एवं जनसेवा भाव से समाचार प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।

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