Singrauli News सीएम के ऐलान हवा में, शासन चौकी ज़मीन पर नशा माफिया का अभेद्य किला सरकारी नशामुक्ति अभियान बेअसर, पुलिस की चुप्पी से बढ़े तस्करों के हौसले
जबकि नशा माफिया बेखौफ होकर अपना नेटवर्क लगातार मजबूत करता जा रहा है

By लाले विश्वकर्मा
सिंगरौली प्रदेश सरकार द्वारा नशे के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त बयानों के बीच सिंगरौली जिले का शासन चौकी क्षेत्र जमीनी हकीकत की अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है। यहां सरकारी नशामुक्ति अभियान महज नारों तक सीमित नजर आ रहा है, जबकि नशा माफिया बेखौफ होकर अपना नेटवर्क लगातार मजबूत करता जा रहा है।
कोरेक्स, गांजा, हीरोइन और ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर शासन चौकी क्षेत्र में कानून किसके लिए है और किसके लिए नहीं।
गांवों में पुलिस नहीं, नशा तस्करों की चलती हुकूमत
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि शासन चौकी क्षेत्र के कई गांवों में नशा तस्कर खुलेआम घूमते नजर आते हैं, लेकिन पुलिस की गश्त नाम मात्र की रह गई है लोगों का कहना है कि जहां नशे की खेप उतरती है, वहां कभी पुलिस दिखाई नहीं देती, लेकिन छोटी-मोटी कार्रवाई दिखाकर कागज़ी खानापूर्ति जरूर कर ली जाती है।
सरकार की मंशा बनाम सिस्टम की सच्चाई
मुख्यमंत्री नशा नेटवर्क को ध्वस्त करने की बात करते हैं, लेकिन शासन चौकी क्षेत्र में उनके आदेश सिस्टम की दीवारों से टकराकर दम तोड़ते नजर आते हैं ग्रामीणों का आरोप है कि यदि ऊपर से मिले निर्देशों पर ईमानदारी से अमल होता, तो नशा माफिया इतनी मजबूती से जड़ें नहीं जमा पाता।
युवाओं की बर्बादी, परिवारों का टूटता भरोसा
नशे की लत ने क्षेत्र के युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में लिया है।
कई परिवारों ने बताया कि नशे के कारण घरों में कलह, आर्थिक तंगी और अपराध बढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। प्रशासन के प्रति लोगों का भरोसा धीरे-धीरे टूटता जा रहा है।
चौकी प्रभारी पर उठे सवाल, संरक्षण की आशंका
क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि बिना किसी स्थानीय संरक्षण के इतना बड़ा नेटवर्क नहीं चल सकता।
ग्रामीणों का कहना है कि चौकी स्तर पर सख्ती दिखाई नहीं देती, जिससे चौकी प्रभारी की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
डीजीपी तक पहुँची बात, अब असली परीक्षा बाकी
स्थानीय स्तर पर लगातार अनदेखी के बाद ग्रामीणों ने यह मामला डीजीपी कार्यालय तक पहुँचा दिया है।
अब यह देखना होगा कि क्या शासन चौकी क्षेत्र में वाकई नशा माफिया पर शिकंजा कसेगा, या फिर सरकारी नारे जमीनी हकीकत के आगे यूं ही बेअसर साबित होते रहेंगे।
इलाके का सवाल—कब टूटेगा नशे का यह किला?
शासन चौकी क्षेत्र के लोग अब सिर्फ बयान नहीं, ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
सवाल साफ है क्या नशामुक्ति अभियान कागज़ों से बाहर निकलेगा?
या फिर शासन चौकी क्षेत्र नशा माफिया का गढ़ बना रहेगा?















