शराब के नशे में हेड कॉन्स्टेबल का हंगामा, टीआई को फोन पर दी गालियां; VIDEO वायरल होते ही एसपी ने किया सस्पेंड
शराब के नशे में धुत प्रधान आरक्षक मुकेश राजपूत ने न केवल सार्वजनिक स्थान पर हंगामा किया,

By लाले विश्वकर्मा
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से पुलिस विभाग की छवि को धूमिल करने वाला मामला सामने आया है। शराब के नशे में धुत प्रधान आरक्षक मुकेश राजपूत ने न केवल सार्वजनिक स्थान पर हंगामा किया, बल्कि थाना प्रभारी को फोन पर अश्लील गालियां भी दीं। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी छतरपुर अगम जैन ने शनिवार देर रात प्रधान आरक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रधान आरक्षक मुकेश राजपूत वर्तमान में पुलिस लाइन में पदस्थ थे और बड़ामलहरा थाना क्षेत्र अंतर्गत न्यायालय में उनकी ड्यूटी लगी हुई थी। वायरल हुए दो अलग-अलग वीडियो में एक वीडियो में वह थाना प्रभारी को फोन पर अभद्र भाषा में गालियां देते नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरे वीडियो में वह शराब के नशे में लड़खड़ाते हुए बाइक स्टार्ट करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।
शराब दुकान पर विवाद से भड़का मामला
बताया जा रहा है कि प्रधान आरक्षक शराब खरीदने शराब दुकान पहुंचे थे, जहां दुकानदार ने उन्हें शराब देने से मना कर दिया और थाना प्रभारी से शिकायत करने की बात कही। इसी बात से नाराज होकर प्रधान आरक्षक ने मौके पर हंगामा शुरू कर दिया और फोन पर थाना प्रभारी को गालियां देने लगे। शराब दुकान के कर्मचारियों ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
कैबिनेट बैठक के दौरान भी दिखाई थी अनुशासनहीनता
सूत्रों के मुताबिक, 8 और 9 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट बैठक खजुराहो में आयोजित थी। उस दौरान बिजावर थाना प्रभारी कमलजीत सिंह ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान भी प्रधान आरक्षक द्वारा शराब के नशे में अनुशासनहीन व्यवहार किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मेडिकल जांच में शराब सेवन की पुष्टि
वीडियो वायरल होने और शिकायत एसपी तक पहुंचने के बाद पुलिस ने प्रधान आरक्षक का मेडिकल परीक्षण (एमएलसी) कराया। जांच में शराब सेवन की पुष्टि होने के बाद एसपी छतरपुर अगम जैन ने देर रात कड़ा कदम उठाते हुए प्रधान आरक्षक मुकेश राजपूत को निलंबित कर दिया।
यह घटना पुलिस विभाग में अनुशासन और जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। वहीं, वरिष्ठ अधिकारियों की त्वरित और सख्त कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि वर्दी की मर्यादा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।















