Singrauli News – देख लीजिए मुख्यमंत्री जी… सिंगरौली से बहरी तक खुलेआम हो रही अवैध कोयले की सप्लाई, पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर कुंभकरण की नींद में, नियमों की उड़ रही धज्जियाँ, कोयला माफिया बेखौफ—शासन को हर महीने लाखों के राजस्व का नुकसान
नियम सिर्फ कागजों में, जमीनी हकीकत अलग

गूंज सिंगरौली की | सीधी / बहरी।
सीधी जिले के बहरी अंचल में इन दिनों कोयले का अवैध कारोबार जिस तरह से खुलेआम संचालित हो रहा है, उसने शासन-प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिंगरौली क्षेत्र से चोरी कर लाया जा रहा कोयला बहरी और आसपास के इलाकों में धड़ल्ले से खपाया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार पुलिस अधिकारी सब कुछ जानते-समझते हुए भी कुंभकरण की नींद में सोए नजर आ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार बहरी क्षेत्र में लंबे समय से कोयले की अवैध खरीद-फरोख्त जारी है। स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी आम लोगों से लेकर संबंधित विभागों तक सभी को है, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे यह सवाल और भी गहरा होता जा रहा है कि आखिर इस पूरे अवैध कारोबार को किसका संरक्षण प्राप्त है।
नियम सिर्फ कागजों में, जमीनी हकीकत अलग
जानकारी के मुताबिक जिले में खनिज विभाग द्वारा सीमित संख्या में कोयला भंडारण केंद्रों को अनुमति दी गई है। नियमानुसार व्यापारियों को भंडारण की सीमा, दस्तावेजी रिकॉर्ड और मासिक विवरण का सख्ती से पालन करना होता है। लेकिन बहरी अंचल में इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
सूत्र बताते हैं कि कई भंडारण केंद्रों पर न तो निर्धारित शर्तों का पालन किया जा रहा है और न ही भंडारण की तय सीमा का ध्यान रखा जा रहा है। इसके बावजूद पुलिस और संबंधित विभागों की ओर से कोई सख्त कार्रवाई न होना संदेह को और गहरा कर रहा है।
मासिक पत्रक नहीं, फिर भी बेखौफ व्यापार
खनिज विभाग के नियमों के अनुसार कोयला व्यापारियों को हर माह मासिक पत्रक जमा करना अनिवार्य है, जिसमें कोयले की आवक-जावक का पूरा ब्यौरा दर्ज रहता है। लेकिन बहरी क्षेत्र में अधिकांश व्यापारी महीनों से मासिक पत्रक जमा नहीं कर रहे हैं, जबकि उनका कारोबार लगातार जारी है।
स्थिति यह है कि वर्तमान में किस भंडारण केंद्र में कितना कोयला मौजूद है, इसकी सटीक जानकारी किसी भी विभाग के पास नहीं है। यह हालात सीधे तौर पर विभागीय लापरवाही और कमजोर निगरानी व्यवस्था को उजागर करते हैं।
सिंगरौली से बहरी तक अवैध कोयले की रातों-रात आवाजाही
सूत्रों के मुताबिक सिंगरौली क्षेत्र से चोरी किया गया कोयला देवसर मार्ग होते हुए बहरी और आसपास के इलाकों तक पहुंचाया जा रहा है। खासतौर पर रात के समय कोयले से लदे वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। आरोप है कि इन वाहनों की न तो नियमित जांच की जा रही है और न ही कोई प्रभावी निगरानी व्यवस्था नजर आ रही है।
गौरतलब है कि पूर्व में भी कोयले से लदे वाहनों की जब्ती की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन कुछ समय बाद यह अवैध नेटवर्क फिर से सक्रिय हो जाता है, जिससे साफ जाहिर होता है कि कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
‘दो नंबर’ कोयले का खेल, रिकॉर्ड से दूरी
सूत्रों का दावा है कि बहरी अंचल में कोयला भंडारण कर व्यापार करने वाले कई व्यापारी कोयले की आवक-जावक का कोई ठोस रिकॉर्ड नहीं रखते। जानकारों के अनुसार यदि वैध यानी ‘एक नंबर’ का कोयला आता, तो उसका पूरा दस्तावेजी रिकॉर्ड अनिवार्य होता। लेकिन यहां कथित तौर पर ‘दो नंबर’ का कोयला खपाया जा रहा है, इसी वजह से रिकॉर्ड संधारण से बचा जा रहा है।
अनुमति से अधिक भंडारण, कार्रवाई नदारद
सूत्र बताते हैं कि बहरी क्षेत्र के कई भंडारण स्थलों पर अनुमति से कहीं अधिक मात्रा में कोयला जमा किया जा रहा है। यह भी चर्चा है कि इस अवैध कारोबार में प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है, जिसके चलते जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने से परहेज कर रहे हैं।
सीएम से सीधा सवाल—कब टूटेगी कुंभकरणी नींद?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन और पुलिस इस अवैध कोयला कारोबार पर सख्त कार्रवाई करेगी, या फिर सिंगरौली से बहरी तक कोयले की यह अवैध सप्लाई यूं ही जारी रहेगी। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो शासन को होने वाला राजस्व नुकसान और बढ़ेगा तथा अवैध कारोबारियों के हौसले और बुलंद होंगे।















