Singrauli News – पुलिस चौकी निवास के सामने बेखौफ चल रहा अवैध रेत का खेल संरक्षण किसका? क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

गूंज सिंगरौली की कार्यालय
सिंगरौली। मिली जानकारी के अनुसार सरई थाना अंतर्गत निवास पुलिस चौकी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का कारोबार दिन-रात धड़ल्ले से चल रहा है। रेत माफियाओं द्वारा ग्राम पंचायत पापल, महुआगांव, हर्दी और निवास क्षेत्र में बहने वाली गोपद नदी का सीना छलनी किया जा रहा है। बावजूद इसके जिम्मेदारों की ओर से ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
बताया जा रहा है कि जैसे ही अंधेरा होता है, वैसे ही कई ट्रैक्टर अवैध रेत लेकर सड़कों पर दौड़ने लगते हैं और सुबह उजाला होने तक यह सिलसिला चलता रहता है। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि एक ट्रैक्टर को रात में चलाने के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारों तक “नजराना” पहुंचाना अनिवार्य होता है, जो कई सीढ़ियों से होकर ऊपर तक पहुंचता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह लुकाछिपी का खेल लंबे समय से जारी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले महीने हर्दी रेलवे स्टेशन के पास नायब तहसीलदार द्वारा की गई कार्रवाई से कुछ दिनों के लिए रेत माफियाओं में खौफ जरूर दिखा, लेकिन महज एक सप्ताह बाद ही फिर से पुराने ढर्रे पर अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर तेज रफ्तार से बाजार और सड़कों पर दौड़ते नजर आने लगे। तेज रफ्तार ट्रैक्टरों से किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध रेत से लदे ट्रैक्टरों को अक्सर नाबालिग बच्चे चलाते देखे जाते हैं, जिससे आमजन की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है। लोगों का सवाल है कि निवास पुलिस चौकी की नींद कब खुलेगी? क्या किसी बड़ी घटना का इंतजार किया जा रहा है? पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह और सवालिया निशान लगातार गहराते जा रहे हैं।
अवैध रेत उत्खनन पर नहीं लग पा रहा अंकुश
मुख्यमंत्री सहित उच्च अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद निवास चौकी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन पर कोई प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है। हाल ही में सीधी जिले के मडवास थाना अंतर्गत टिकरी चौकी क्षेत्र में अवैध रेत से लदे ट्रैक्टर की चपेट में आकर एक आदिवासी युवक की मौत का मामला सामने आया था, लेकिन इसके बाद भी निवास चौकी क्षेत्र में कोई सबक लिया जाता नजर नहीं आ रहा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या पुलिस अधिकारी और खनिज विभाग मिलकर इस अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगा पाएंगे, या फिर ऐसे ही बेखौफ तरीके से रेत माफियाओं का खेल आगे भी चलता रहेगा।















