Singrauli News – खुटार चौकी क्षेत्र में खुलेआम फल-फूल रहा अवैध रेत का कारोबार दिनदहाड़े सड़कों पर दौड़ रहे रेत से लदे ट्रैक्टर, पुलिस संरक्षण के आरोप
स्थानीय सूत्रों के अनुसार कटौली, पिपराझांपी, परसौना, अमिलवान, खजुरी, सिद्धी, चितरवई और जरहा सहित आसपास के क्षेत्रों में नदियों और रेत घाटों से अवैध रूप से रेत का उत्खनन किया जा रहा है

By सोनू विश्वकर्मा
कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत खुटार पुलिस चौकी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का कारोबार इन दिनों चरम पर है। स्थिति यह है कि दिनदहाड़े करीब 20 से अधिक ट्रैक्टर अवैध रूप से रेत का परिवहन करते देखे जा सकते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
कई गांवों से हो रहा अवैध उत्खनन
स्थानीय सूत्रों के अनुसार कटौली, पिपराझांपी, परसौना, अमिलवान, खजुरी, सिद्धी, चितरवई और जरहा सहित आसपास के क्षेत्रों में नदियों और रेत घाटों से अवैध रूप से रेत का उत्खनन किया जा रहा है। इसके बाद ट्रैक्टरों के माध्यम से रेत को आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों में बेधड़क सप्लाई किया जा रहा है।
पुलिस संरक्षण के आरोप, कार्रवाई पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध रेत परिवहन में संलिप्त लोगों को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है। इसी वजह से रेत माफिया बिना किसी डर के कारोबार न कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद न तो ट्रैक्टरों को रोका गया न और न ही उत्खनन स्थलों पर कोई प्रभावी कार्रवाई हुई।
राजनीतिक संरक्षण की भी चर्चा
क्षेत्र में यह चर्चा भी आम है कि कुछ प्रभावशाली भाजपा नेताओं के ट्रैक्टर भी अवैध रेत परिवहन में लगे हुए हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इन चर्चाओं ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। राजनीतिक संरक्षण की आशंका के चलते प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पर्यावरण और राजस्व को भारी नुकसान
अवैध रेत उत्खनन से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो रही है और भू-क्षरण का खतरा बढ़ गया है। साथ ही शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और खनिज विभाग से मांग की है कि अवैध रेत उत्खनन व परिवहन पर तत्काल रोक लगाई जाए। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए, ताकि पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ कानून का राज कायम हो सके।















